ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभेरी जब बजती है, तो केवल शंखों की गूंज नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच छिड़े उस भीषण द्वंद्व की गाथा भी सुनाती है, जिसे सुनकर हृदय आज भी कांप उठता है।
भीष्मपर्व · अध्याय 7
पितामह का रणकौशल