ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में शंखों के निनाद से आकाश गूँज उठा है और युद्ध की विभीषिका अब अपने चरम पर पहुँच रही है।
भीष्मपर्व · अध्याय 72
बढ़ता हुआ तनाव