ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब काल का चक्र थमा, तब गंगापुत्र भीष्म की शरशैया ने धर्म और कर्तव्य का एक ऐसा महाकाव्य रचा, जिसकी गूँज आज भी सुनाई देती है।
भीष्मपर्व · अध्याय 8
भीष्म का शरशैया की ओर प्रस्थान