ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब गुरु द्रोण का प्रचंड प्रताप पांडवों की नींव हिलाने लगा, तब धर्म और अधर्म की वह निर्णायक बेला आ पहुँची थी।
भीष्मपर्व · अध्याय 83
पांडवों का प्रत्युत्तर