ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस रणभूमि की धूल में आज भी एक ऐसे पितामह का मौन सुनाई देता है, जिन्होंने बाणों की शय्या पर लेटकर काल को स्वयं ठहरने पर विवश कर दिया था।
भीष्मपर्व · अध्याय 99
पितामह का शरशय्या पर पतन