ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि से उठती हुई शोक की वह गूँज, आज भी हमें नियति के कठोर सत्य का बोध कराती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 101
दुर्योधन का शोक