ग्रंथसार
रणक्षेत्र की धूल और रक्त के उस मंजर में केवल शस्त्रों का नहीं, बल्कि मर्यादा और अधर्म की परीक्षा का महायुद्ध चल रहा था।
द्रोणपर्व · अध्याय 109
कूटनीति का जाल