ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम कालखंड की कथा आज भी हृदय में वैसी ही सिहरन पैदा कर देती है, जैसे कल ही वह घटना घटी हो।
द्रोणपर्व · अध्याय 112
आचार्य का महाप्रयाण