ग्रंथसार
आचार्य द्रोण के देहावसान के पश्चात कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जो भीषण सन्नाटा और क्रोध का ज्वार उठा, वह इतिहास के पन्नों पर आज भी अंकित है।
द्रोणपर्व · अध्याय 113
धृष्टद्युम्न का क्रोध