ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम रण की गूँज आज भी इतिहास के पन्नों में एक गहरी वेदना बनकर शेष है, जहाँ सूर्य के अस्त होने के साथ ही धर्म और अधर्म का महासंग्राम अपने अंतिम पड़ाव पर था।
द्रोणपर्व · अध्याय 119
निर्णायक महासंग्राम