ग्रंथसार
अभिमन्यु का बलिदान केवल एक योद्धा की मृत्यु नहीं, बल्कि अधर्म के विनाश का शंखनाद था जिसे सुनकर आज भी इतिहास की धड़कनें रुक जाती हैं।
द्रोणपर्व · अध्याय 123
अधर्म का जंजाल