ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की उस धधकती रणभूमि में अर्जुन का मौन केवल एक पिता का शोक नहीं, बल्कि धर्म के भीषण निर्णय की आहट थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 125
श्रीकृष्ण और अर्जुन का आगमन