ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण रण में जब धर्म और अधर्म की सीमाएं धुंधली पड़ गईं, तब एक ऐसे प्रहार ने इतिहास की धारा ही बदल दी जिसके घाव आज भी युगों तक टीसते हैं।
द्रोणपर्व · अध्याय 131
धृष्टद्युम्न का घातक प्रहार