ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण अंतिम प्रहर की धूल और रक्त की गंध आज भी समय के पन्नों में जीवित है, जहाँ गुरुपुत्र का क्रोध काल बनकर उमड़ पड़ा था।
द्रोणपर्व · अध्याय 133
अश्वत्थामा का आगमन और क्रोध