ग्रंथसार
महाभारत की रणभेरी जब द्रोणाचार्य के अवसान के बाद मौन हुई, तो उस सन्नाटे को चीरकर एक नए सेनापति का संकल्प कुरुक्षेत्र की धूल में एक नया इतिहास लिखने जा रहा था।
द्रोणपर्व · अध्याय 135
कर्ण की प्रतिज्ञा और व्यूह रचना