ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दबे उस अंतिम प्रहर की गूँज आज भी इतिहास के पन्नों को कंपकंपा देती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 136
अंतिम संघर्ष की पूर्व संध्या