ग्रंथसार
वीर अभिमन्यु का वह रणकौशल आज भी शौर्य की पराकाष्ठा का प्रतीक है, जिसे सुनकर हृदय में धर्म के प्रति निष्ठान जाग उठती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 14
अभिमन्यु का पराक्रम