ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में जब शल्य जैसे महारथी का पतन हुआ, तब धर्म की विजय का शंखनाद स्वयं काल की गति को भी स्तब्ध कर गया था।
द्रोणपर्व · अध्याय 143
मद्रराज शल्य का वध