ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम विलाप में केवल रक्त की गंध नहीं, बल्कि प्रतिशोध की वह अग्नि धधक रही थी जिसने पूरी सभ्यता का भविष्य बदल दिया।
द्रोणपर्व · अध्याय 149
अश्वत्थामा का विलाप