ग्रंथसार
अंधकार से ढकी उस विनाशकारी रात की स्मृतियाँ आज भी इतिहास के पन्नों में करुण क्रंदन बनकर गूँजती हैं।
द्रोणपर्व · अध्याय 151
शिविर में नरसंहार