ग्रंथसार
महाभारत के महासमर की अंतिम गूँज केवल विजय का शंखनाद नहीं, बल्कि विनाश के क्रंदन में सिमट गई थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 152
परिणाम और प्रतिशोध की ज्वाला