ग्रंथसार
अश्वत्थामा के हृदय में जलती प्रतिशोध की वह अग्नि आज भी इतिहास के पन्नों पर कालिख की तरह अंकित है।
द्रोणपर्व · अध्याय 159
अश्वत्थामा का रौद्र रूप