ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम कालखंड में जब योद्धाओं की वीरता नियति के आगे मौन हो रही थी, तब कर्ण का सेनापति बनना एक ऐसी आंधी के समान था जिसने समूचे महाभारत को झकझोर कर रख दिया था।
द्रोणपर्व · अध्याय 160
कौरव सेना का नया नेतृत्व