ग्रंथसार
क्या एक वीर का पराक्रम उसके भाग्य की बेड़ियों को काट सकता है, या नियति स्वयं ही युद्ध का परिणाम तय कर देती है?
द्रोणपर्व · अध्याय 163
भाग्य का पहिया