ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रक्त रंजित धरा पर जब सूर्यपुत्र कर्ण का मस्तक गिरा, तब आकाश की आभा भी म्लान हो गई थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 164
महाबली कर्ण का अंत