ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दबे उस अंतिम दृश्य को आज भी इतिहास अपनी गहरी सांसों में समेटे हुए है, जहाँ धर्म और अधर्म का नहीं, अपितु अहंकार और न्याय का अंतिम मिलन हुआ था।
द्रोणपर्व · अध्याय 171
अंतिम प्रहार