ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रक्त-रंजित धरा पर जब मर्यादाओं का सूर्य अस्त हुआ, तब मानवता ने विनाश का वह रौद्र रूप देखा जिसे इतिहास आज भी अपनी थरथराती लेखनी से दर्ज करता है।
द्रोणपर्व · अध्याय 28
महाविनाश की अनुगूंज