ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दबे उस भीषण सत्य को समझना आवश्यक है, जहाँ एक गुरु की करुणा और शिष्य का आवेश आपस में टकरा गए थे।
द्रोणपर्व · अध्याय 32
आचार्य का पतन और रणभूमि की शांति