ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण रण में जब धर्म और अधर्म का विवेक धुंधला पड़ने लगा, तब आचार्य द्रोण का पतन केवल एक योद्धा की मृत्यु नहीं, बल्कि एक युग की समाप्ति थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 36
आचार्य का मोहभंग