ग्रंथसार
वीरता आयु की मोहताज नहीं होती, यह बात कुरुक्षेत्र की उस रणभूमि में एक बालक ने अपने रक्त से लिख दी थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 38
अभिमन्यु का बलिदान