ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि से उठती हुई शोक की यह गूँज आज भी हमें धर्म और कर्तव्य के सूक्ष्म भेदों को समझने की प्रेरणा देती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 44
कौरवों का शोक