ग्रंथसार
क्या कभी आपने सोचा है कि जब साक्षात नारायण का अस्त्र रणभूमि में उतरता है, तो उसे पराजित करने के लिए शस्त्र की नहीं, समर्पण की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
द्रोणपर्व · अध्याय 47
नारायणास्त्र का आतंक