ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण समर की गूँज आज भी इतिहास की गहराइयों में किसी रहस्यमयी गर्जना की भाँति सुनाई देती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 54
चक्रव्यूह का भेदन