ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब गुरु और शिष्य आमने-सामने आए, तब धर्म और कर्तव्य का वह द्वंद्व उत्पन्न हुआ जिसे सुनकर आज भी मर्मज्ञों का हृदय कांप उठता है।
द्रोणपर्व · अध्याय 61
रणक्षेत्र में गतिरोध