ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण अंतिम प्रहर की गूँज आज भी इतिहास के पन्नों में करुणा और सत्य के संघर्ष की गाथा सुनाती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 72
सेनापतित्व का समापन