ग्रंथसार
महाभारत का वह युद्ध केवल अस्त्रों का संघर्ष नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच बुना गया एक ऐसा चक्र था जिसमें प्राणों से अधिक परीक्षा वीरता और नैतिकता की हुई थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 74
चक्रव्यूह की रचना