ग्रंथसार
वीर पुत्र अभिमन्यु के बलिदान की गाथा सुनकर आज भी कुरुक्षेत्र की धूल में एक अद्भुत शौर्य और कर्तव्य की गूँज सुनाई देती है।
द्रोणपर्व · अध्याय 75
अभिमन्यु का बलिदान