ग्रंथसार
महाभारत के उस महासमर की गूँज आज भी कुरुक्षेत्र की धूल में दबी हुई है, जहाँ गुरु और शिष्य के संबंधों की पराकाष्ठा ने इतिहास की दिशा बदल दी थी।
द्रोणपर्व · अध्याय 78
कौरव व्यूह का भेदन