ग्रंथसार
सूर्य के ढलते ही क्यों काँप उठी थी कुरुक्षेत्र की धरा, आइए, आज सूतजी से सुनते हैं उस निर्णायक क्षण की गाथा।
द्रोणपर्व · अध्याय 79
जयद्रथ का वध