ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस महासंग्राम में जब रक्त की नदियाँ बह रही थीं, तब केवल शस्त्र ही नहीं, मर्यादाएँ भी रणभूमि की धूल में मिल रही थीं।
द्रोणपर्व · अध्याय 83
युद्ध का विकराल रूप