ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस भीषण रणभूमि में जब काल का चक्र घूमा, तो अभिमन्यु का शौर्य आज भी इतिहास की धड़कनों में गूंजता है।
द्रोणपर्व · अध्याय 89
चक्रव्यूह की रचना