ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रणभूमि में जब सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ रहा था, तब एक ऐसा योद्धा सेनापति के रूप में उभरा, जिसने नियति की दिशा ही बदल दी।
द्रोणपर्व · अध्याय 96
कर्ण का सेनापतित्व