ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में धंसे उस पहिये और कर्ण के भीतर मचे द्वंद्व की कथा, आज भी मनुष्य को उसके धर्म का आईना दिखाती है।
कर्णपर्व · अध्याय 11
धंसता पहिया और टूटी आशा