ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम महासमर की गूँज आज भी इतिहास के पन्नों में प्राण फूँक देती है, जब नियति और पराक्रम आमने-सामने थे।
कर्णपर्व · अध्याय 17
सेनापति का संकल्प