ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र के उस अंतिम क्षण में, जहाँ नियति ने स्वयं अपना चक्र घुमाया था, वहाँ धर्म और कर्म का सूक्ष्म द्वंद्व आज भी हमें सत्य का बोध कराता है।
कर्णपर्व · अध्याय 23
भाग्य का चक्र