ग्रंथसार
क्या भाग्य की रेखाएं कर्म के चक्र से बड़ी होती हैं, या रथ का पहिया केवल मिट्टी में नहीं, बल्कि पूर्व के संचित कर्मों में फंसता है?
कर्णपर्व · अध्याय 27
रथ का पहिया धंसा