ग्रंथसार
युद्ध के मैदान में जब रथ की बागडोर एक ऐसे सारथी के हाथ में हो, जो स्वयं योद्धा के मन में संदेह के बीज बोने पर तुला हो, तो विजय का मार्ग कितना कठिन हो जाता है?
कर्णपर्व · अध्याय 3
शल्य के शंका और कटाक्ष