ग्रंथसार
मित्र के विछोह में जब एक सम्राट का अहंकार धूल में मिल जाता है, तब नियति का क्रूर चेहरा सामने आता है।
कर्णपर्व · अध्याय 34
दुर्योधन का विषाद