ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की धूल में दबे कर्ण के उस पराक्रमी मस्तक को देख, मानो काल की गति भी ठिठक गई थी।
कर्णपर्व · अध्याय 35
कौरवों का विलाप