ग्रंथसार
कुरुक्षेत्र की रक्त-रंजित धरा पर जब अंतिम सूर्य अस्त हो रहा था, तब केवल एक योद्धा का नहीं, अपितु दुर्योधन के अहंकार और विश्वास का भी सूर्यास्त हो रहा था।
कर्णपर्व · अध्याय 44
दुर्योधन का विलाप